पंच धुनी का 7वां दिन: शिव मंदिर खैरी की 41 दिन की अग्नि तपस्या



शिवधाम खैरी मानव कल्याण समिति एवं समस्त ग्रामवासियों द्वारा आयोजित पंच धुनी की 41 दिन की अद्भुत अग्नि तपस्या का आज 7वां दिन है। यह तपस्या शिव मंदिर खैरी में चल रही है, जो ग्रामीणों के बीच श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का केंद्र बनी हुई है। इस धार्मिक अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण और समाज में शांति, समृद्धि तथा सद्भावना का प्रसार करना है।
तपस्या की शुरुआत
इस अद्भुत अनुष्ठान की शुरुआत पांच उपलों से होती है और हर रोज इसमें एक उपला और जोड़ा जाता है। यानी, पहले दिन पांच उपलों से तपस्या की शुरुआत होती है और दूसरे दिन इसमें छठा उपला जुड़ जाता है। इसी प्रकार, प्रत्येक दिन एक-एक उपला बढ़ते हुए यह 41वें दिन तक पहुँचती है, जब 45 उपलों के साथ तपस्या संपन्न होती है। इस प्रकार यह अनुष्ठान आग की बढ़ती हुई शक्ति और तपस्या के गहनता को दर्शाता है।
पंच धुनी का महत्व
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पंच धुनी का विशेष महत्व है। पंच धुनी में पांच धुनियाँ (धूप, दीप, दीपक, दीपक, और मंत्र) शामिल होती हैं, जो मिलकर इस अनुष्ठान को संपन्न करती हैं। ये धुनियाँ मिलकर एक पवित्र और शुद्ध वातावरण का निर्माण करती हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 
ग्रामीणों की सहभागिता
शिवधाम खैरी मानव कल्याण समिति के तत्वावधान में इस आयोजन में समस्त ग्रामवासी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। ग्रामीणों का सहयोग और सहभागिता इस अनुष्ठान को और भी विशेष बना रही है। सभी ग्रामीण अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए इस अनुष्ठान को सफल बनाने में जुटे हैं। 
धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव
शिव मंदिर खैरी में हो रही इस अग्नि तपस्या का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव व्यापक है। यह अनुष्ठान ग्रामीण जीवन में आध्यात्मिकता का संचार करता है और उन्हें भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इस अनुष्ठान से न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति और समृद्धि आती है, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है।
आयोजन की विधि
प्रत्येक दिन मंत्रोच्चारण के साथ उपलों को अग्नि में अर्पित किया जाता है। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है, जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक हो जाता है। ग्रामीणों का समूह मिलकर भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए इस अनुष्ठान में हिस्सा लेता है।
तपस्या का संदेश
पंच धुनी की यह अग्नि तपस्या एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि हमें अपने जीवन में संयम, समर्पण और श्रद्धा के साथ कर्म करने चाहिए। यह अनुष्ठान हमें यह सिखाता है कि धैर्य और तपस्या के माध्यम से हम अपने जीवन में किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं और भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष
शिव मंदिर खैरी में आयोजित हो रही 41 दिन की पंच धुनी अग्नि तपस्या न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में आध्यात्मिकता, एकता और समर्पण की भावना को जागृत करने का प्रयास भी है। शिवधाम खैरी मानव कल्याण समिति और समस्त ग्रामवासियों का यह प्रयास निस्संदेह प्रशंसनीय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
अद्भुत अनुष्ठान के सातवें दिन पर, हम सभी भगवान शिव की असीम कृपा की कामना करते हैं और इस तपस्या के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने की प्रार्थना करते हैं। जय भोलेनाथ

शिवधाम खैरी मानव कल्याण समिति 

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